मुख्य सामग्री पर जाएँ
ऋद्धि, मंत्र और यंत्र

श्लोक 3

ऋद्धि

ॐ ह्रीं अर्हं णमो आयरियाणं


मंत्र

ॐ ह्रीं क्लीं ऐं अर्हं नमः स्वाहा

विधि

नित्य प्रातः यंत्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर श्लोक का पाठ करें। तत्पश्चात् ऋद्धि-मंत्र का ९ बार और मूल मंत्र का १०८ बार जाप करें।

फल

परंपरा के अनुसार विघ्न-शांति। यह पाठ परंपरा से प्राप्त है; कोई लाभ का दावा नहीं।