मोनैं प्यारा लागै छै जी अर जिनराज । मोनें वाल्हा लागै छै जी अर जिनराज ।। अर जिन कर्म-अरी नां हंता, जगत उधारण ज्हाज । मोनें वाल्हा लागै छै जी अर जिनराज ।। १ ।।
प्रभो ! तुम अहितकर कर्मों को प्रतिहत करने वाले हो और संसार-समुद्र से उद्धार करने के लिए जलपोत के समान हो ।