मुख्य सामग्री पर जाएँ
‹ चौबीस तीर्थंकर
18अष्टादश तीर्थंकर

भगवान अरनाथ

Aranath

अरहनाथ
चिन्हनंद्यावर्त
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
सुदर्शन
माता
देवी (मित्रा/महादेवी)
जन्म नगरी
हस्तिनापुर
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
यक्षेन्द्र (यक्षेट)
यक्षिणी
धारिणी (धरणप्रिया)
गणधर
33
चैत्य वृक्ष
आम्र (चूत)

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं अरनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री अरनाथाय नमः ।

मोनैं प्यारा लागै छै जी अर जिनराज । मोनें वाल्हा लागै छै जी अर जिनराज ।। अर जिन कर्म-अरी नां हंता, जगत उधारण ज्हाज । मोनें वाल्हा लागै छै जी अर जिनराज ।। १ ।।

प्रभो ! तुम अहितकर कर्मों को प्रतिहत करने वाले हो और संसार-समुद्र से उद्धार करने के लिए जलपोत के समान हो ।

पूरी चौबीसी पढ़ें (7 गाथा) ›

स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)