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‹ चौबीस तीर्थंकर
19उन्नीसवें तीर्थंकर

भगवान मल्लिनाथ

Mallinath

चिन्हकलश
वर्णनील (नीलम)

परिवार एवं संघ

पिता
कुम्भ
पिता की गति
चौथे देवलोक माहेन्द्र में
माता
प्रभावती
माता की गति
चौथे देवलोक माहेन्द्र में
जन्म नगरी
मिथिला
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
कुबेर
यक्षिणी
धरणप्रिया (वैरोट्या)
गणधर
28
चैत्य वृक्ष
अशोक

जीवन की तिथियाँ

जन्म तिथि
मार्गशीर्ष शु. 11
नक्षत्र
अश्विनी
दीक्षा तिथि
मार्गशीर्ष शु. 11
दीक्षा साथी
300
केवलज्ञान तिथि
मार्गशीर्ष शु. 11
छद्मस्थ काल
एक अहोरात्र

चिह्न, शरीर और आयु

लक्षण चिह्न
कलश
शरीर मान
25 धनुष
साधक जीवन
54900 वर्ष
आयुमान
55000 वर्ष

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

निर्वाण तिथि
फाल्गुन शु. 12
निर्वाण साथी
1,000
नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री मल्लिनाथाय नमः ।

मल्लि जिनेश्‍वर नाम समर तरण शरण आयो । नील वर्ण मल्लि जिनेश्‍वर, ध्यान निर्मल ध्यायो । अल्प काल मांहि प्रभू, परम-ज्ञान पायो ।। १ ।।

तुम्हारा वर्ण नील है । तुमने निर्मल ध्यान किया और अल्पकाल में (एक प्रहर के बाद) परमज्ञान (केवलज्ञान) पा लिया ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)