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‹ चौबीस तीर्थंकर
19उन्नीसवें तीर्थंकर

भगवान मल्लिनाथ

Mallinath

चिन्हकलश
वर्णनील (नीलम)

परिवार एवं संघ

पिता
कुम्भ
माता
प्रभावती
जन्म नगरी
मिथिला
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
कुबेर
यक्षिणी
धरणप्रिया (वैरोट्या)
गणधर
28
चैत्य वृक्ष
अशोक

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं मल्लिनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री मल्लिनाथाय नमः ।

मल्लि जिनेश्‍वर नाम समर तरण शरण आयो । नील वर्ण मल्लि जिनेश्‍वर, ध्यान निर्मल ध्यायो । अल्प काल मांहि प्रभू, परम-ज्ञान पायो ।। १ ।।

तुम्हारा वर्ण नील है । तुमने निर्मल ध्यान किया और अल्पकाल में (एक प्रहर के बाद) परमज्ञान (केवलज्ञान) पा लिया ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)