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‹ चौबीस तीर्थंकर
20बीसवें तीर्थंकर

भगवान मुनिसुव्रत

Munisuvrat

मुनिसुव्रतनाथ
चिन्हकच्छप
वर्णश्याम

परिवार एवं संघ

पिता
सुमित्र
माता
पद्मावती
जन्म नगरी
राजगृह
वंश
हरिवंशवंश
यक्ष
वरुण
यक्षिणी
नरदत्ता (बहुरूपिणी)
गणधर
18
चैत्य वृक्ष
चम्पक

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं मुनिसुव्रत ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री मुनिसुव्रताय नमः ।

प्रभूजी ! आप प्रबल बड़ भागी । त्रिभुवन दीपक सागी रा ।। सुमित्रनन्दन श्री मुनिसुव्रत, जगतनाथ जिन जाणी । चारित्र ले केवल उपजायो, उपशम रस नीं वाणी रा ।। १ ।।

सुमित्र राजा के पुत्र मुनिसुव्रत प्रभु ! तुम जगत् के नाथ हो । तुमने चारित्र स्वीकार कर केवलज्ञान प्राप्‍त किया । तुम्हारी वाणी उपशम रसमय थी ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)