20बीसवें तीर्थंकर
भगवान मुनिसुव्रत
Munisuvrat
कच्छप
श्याम
परिवार एवं संघ
- सुमित्र
- चौथे देवलोक माहेन्द्र में
- पद्मावती
- चौथे देवलोक माहेन्द्र में
- राजगृह
- हरिवंशवंश
- वरुण
- नरदत्ता (बहुरूपिणी)
- 18
- चम्पक
जीवन की तिथियाँ
- ज्येष्ठ कृ. 8
- श्रवण
- फाल्गुन शु. 12
- 1000
- फाल्गुन कृ. 12
- ग्यारह मास
चिह्न, शरीर और आयु
- कछुआ
- 20 धनुष
- 7500 वर्ष
- 30000 वर्ष
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- ज्येष्ठ कृ. 9
- 1,000
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री मुनिसुव्रताय नमः ।
प्रभूजी ! आप प्रबल बड़ भागी । त्रिभुवन दीपक सागी रा ।। सुमित्रनन्दन श्री मुनिसुव्रत, जगतनाथ जिन जाणी । चारित्र ले केवल उपजायो, उपशम रस नीं वाणी रा ।। १ ।।
पूरी चौबीसी पढ़ें (7 गाथा) ›