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‹ चौबीस तीर्थंकर
17सप्तदश तीर्थंकर

भगवान कुंथुनाथ

Kunthunath

चिन्हबकरा
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
सूर (शूरसेन)
माता
श्री (श्रीदेवी)
जन्म नगरी
हस्तिनापुर
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
गन्धर्व
यक्षिणी
बला (अच्युता)
गणधर
35
चैत्य वृक्ष
तिलक

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं कुंथुनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री कुन्थुनाथाय नमः ।

प्रभु को समरण कर नीको रे । कुन्थु जिनेश्‍वर करुणा-सागर, त्रिभुवन सिर टीको रे । प्रभु को समरण कर नीको रे ।। १ ।।

कुन्थु प्रभु ! तुम करुणासागर और त्रिभुवन के सिर पर तिलक हो ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)