16षोडश तीर्थंकर
भगवान शांतिनाथ
Shantinath
मृग
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- विश्वसेन
- तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
- अचिरा
- तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
- हस्तिनापुर
- इक्ष्वाकुवंश
- गरुड
- निर्वाणी
- 36
- नन्दी (नन्दिवृक्ष)
जीवन की तिथियाँ
- ज्येष्ठ कृ. 13
- भरणी
- ज्येष्ठ कृ. 14
- 1000
- पौष शु. 9
- एक वर्ष
चिह्न, शरीर और आयु
- हरिण
- 40 धनुष
- 25000 वर्ष
- 1 लाख वर्ष
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- ज्येष्ठ कृ. 13
- 900
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री शान्तिनाथाय नमः ।
बलिहारी हो शांति जिणंद की । शांति करण प्रभु शांतिनाथजी, शिवदायक सुखकंद की । बलिहारी हो शांति जिणंद की ।। १ ।।
पूरी चौबीसी पढ़ें (7 गाथा) ›