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‹ चौबीस तीर्थंकर
15पंचदश तीर्थंकर

भगवान धर्मनाथ

Dharmanath

चिन्हवज्र
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
भानु
माता
सुव्रता
जन्म नगरी
रत्नपुरी
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
किन्नर
यक्षिणी
कन्दर्पा (पन्नगा)
गणधर
43
चैत्य वृक्ष
दधिपर्ण

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं धर्मनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री धर्मनाथाय नमः ।

अहो प्रभु परम देव प्यारा । धर्म जिन धर्म तणा धोरी, त्रटक मोह-पाश नाख्या तोड़ी । चरण-धर्म आतम सूं जोड़ी, अहो प्रभु परम देव प्यारा ।। १ ।।

धर्म प्रभु ! तुम धर्म-धुरा को धारण करने वाले हो । तुमने चारित्र धर्म के साथ आत्मा को जोड़ा और एक झटके से मोहपाश तोड़ डाला ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)