15पंचदश तीर्थंकर
भगवान धर्मनाथ
Dharmanath
वज्र
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- भानु
- सुव्रता
- रत्नपुरी
- इक्ष्वाकुवंश
- किन्नर
- कन्दर्पा (पन्नगा)
- 43
- दधिपर्ण
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
नक्शे पर देखें ↗स्तुति
ॐ ह्रीं श्री धर्मनाथाय नमः ।
अहो प्रभु परम देव प्यारा । धर्म जिन धर्म तणा धोरी, त्रटक मोह-पाश नाख्या तोड़ी । चरण-धर्म आतम सूं जोड़ी, अहो प्रभु परम देव प्यारा ।। १ ।।
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