अहो प्रभु परम देव प्यारा । धर्म जिन धर्म तणा धोरी, त्रटक मोह-पाश नाख्या तोड़ी । चरण-धर्म आतम सूं जोड़ी, अहो प्रभु परम देव प्यारा ।। १ ।।
धर्म प्रभु ! तुम धर्म-धुरा को धारण करने वाले हो । तुमने चारित्र धर्म के साथ आत्मा को जोड़ा और एक झटके से मोहपाश तोड़ डाला ।