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‹ चौबीस तीर्थंकर
14चतुर्दश तीर्थंकर

भगवान अनंतनाथ

Anantnath

चिन्हश्येन
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
सिंहसेन
माता
सुयशा
जन्म नगरी
अयोध्या
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
पाताल
यक्षिणी
अंकुशा
गणधर
50
चैत्य वृक्ष
अश्वत्थ (पीपल)

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं अनंतनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री अनन्तनाथाय नमः ।

पायो पद जिनराज नौं सुध ध्यान निर्मल ध्याय भलां जी कांई ।। अनंत नाम-जिन चवदमां रे, द्रव्य चौथे गुणठाण । भावे जिन हुवै तेरमे रे, इतलै द्रव्य जिन जाण ।। १ ।।

अनन्तनाथ प्रभो ! चतुर्थ गुणस्थान में तुम द्रव्य (भावी) तीर्थंकर थे । वास्तव में तीर्थंकर तेरहवें गुणस्थान में होते हैं, उससे पहले द्रव्य तीर्थंकर होते हैं ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)