14चतुर्दश तीर्थंकर
भगवान अनंतनाथ
Anantnath
श्येन
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- सिंहसेन
- तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
- सुयशा
- तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
- अयोध्या
- इक्ष्वाकुवंश
- पाताल
- अंकुशा
- 50
- अश्वत्थ (पीपल)
जीवन की तिथियाँ
- बैशाख कृ. 13
- रेवती
- बैशाख कृ. 14
- 1000
- बैशाख कृ. 14
- तीन वर्ष
चिह्न, शरीर और आयु
- बाज (श्येन)
- 50 धनुष
- साढ़े सात लाख वर्ष
- 30 लाख वर्ष
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- चैत्र शु. 5
- 7,000
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री अनन्तनाथाय नमः ।
पायो पद जिनराज नौं सुध ध्यान निर्मल ध्याय भलां जी कांई ।। अनंत नाम-जिन चवदमां रे, द्रव्य चौथे गुणठाण । भावे जिन हुवै तेरमे रे, इतलै द्रव्य जिन जाण ।। १ ।।
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