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‹ चौबीस तीर्थंकर
13त्रयोदश तीर्थंकर

भगवान विमलनाथ

Vimalnath

चिन्हशूकर
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
कृतवर्मा
पिता की गति
तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
माता
श्यामा (सुरम्या)
माता की गति
तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
जन्म नगरी
कम्पिलपुर (काम्पिल्य)
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
षण्मुख (कुमार)
यक्षिणी
विदिता (विजया)
गणधर
57
चैत्य वृक्ष
जम्बू

जीवन की तिथियाँ

जन्म तिथि
माघ शु. 3
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपद
दीक्षा तिथि
माघ शु. 4
दीक्षा साथी
1000
केवलज्ञान तिथि
पौष शु. 6
छद्मस्थ काल
दो मास

चिह्न, शरीर और आयु

लक्षण चिह्न
शूकर
शरीर मान
60 धनुष
साधक जीवन
15 लाख वर्ष
आयुमान
60 लाख वर्ष

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

निर्वाण तिथि
आषाढ़ कृ. 7
निर्वाण साथी
6,000
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स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री विमलनाथाय नमः ।

साहिब ! शरण तिहारै हो, शरण तिहारै, शरण तिहारै, शरण तिहारै हो । विमल प्रभु ! सेवक नीं अरदास, आयो शरण तिहारै हो । विमल करण प्रभु विमलनाथजी, विमल आप वर रीत । विमल ध्यान धरतां हुवै निर्मल, उन मन लागी प्रीत ।। १ ।।

विमल बनाने वाले विमल प्रभो ! तुम सचमुच ! विमल हो । विमल का ध्यान करने वाला निर्मल बन जाता है । तुम्हारे प्रति मेरा शरीर और मन दोनों प्रीति से सराबोर हो गये ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)