13त्रयोदश तीर्थंकर
भगवान विमलनाथ
Vimalnath
शूकर
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- कृतवर्मा
- तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
- श्यामा (सुरम्या)
- तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
- कम्पिलपुर (काम्पिल्य)
- इक्ष्वाकुवंश
- षण्मुख (कुमार)
- विदिता (विजया)
- 57
- जम्बू
जीवन की तिथियाँ
- माघ शु. 3
- उत्तरभाद्रपद
- माघ शु. 4
- 1000
- पौष शु. 6
- दो मास
चिह्न, शरीर और आयु
- शूकर
- 60 धनुष
- 15 लाख वर्ष
- 60 लाख वर्ष
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- आषाढ़ कृ. 7
- 6,000
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री विमलनाथाय नमः ।
साहिब ! शरण तिहारै हो, शरण तिहारै, शरण तिहारै, शरण तिहारै हो । विमल प्रभु ! सेवक नीं अरदास, आयो शरण तिहारै हो । विमल करण प्रभु विमलनाथजी, विमल आप वर रीत । विमल ध्यान धरतां हुवै निर्मल, उन मन लागी प्रीत ।। १ ।।
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