साहिब ! शरण तिहारै हो, शरण तिहारै, शरण तिहारै, शरण तिहारै हो । विमल प्रभु ! सेवक नीं अरदास, आयो शरण तिहारै हो । विमल करण प्रभु विमलनाथजी, विमल आप वर रीत । विमल ध्यान धरतां हुवै निर्मल, उन मन लागी प्रीत ।। १ ।।
विमल बनाने वाले विमल प्रभो ! तुम सचमुच ! विमल हो । विमल का ध्यान करने वाला निर्मल बन जाता है । तुम्हारे प्रति मेरा शरीर और मन दोनों प्रीति से सराबोर हो गये ।