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‹ चौबीस तीर्थंकर
12द्वादश तीर्थंकर

भगवान वासुपूज्य

Vasupujya

वासुपूज्य स्वामी
चिन्हभैंसा
वर्णरक्त

परिवार एवं संघ

पिता
वसुपूज्य
माता
जया
जन्म नगरी
चम्पापुरी
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
कुमार
यक्षिणी
चण्डा (प्रचण्डा)
गणधर
66
चैत्य वृक्ष
पाटला (कदम्ब)

निर्वाण स्थल

चम्पापुरी

परंपरा के अनुसार यहीं वासुपूज्य ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री वासुपूज्याय नमः ।

प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी ! द्वादशमा जिनवर भजियै, राग द्वैष मच्छर माया तजियै । प्रभु लाल वरण तन छिब जाणी, प्रभु वासुपूज्य भचलै प्राणी ।। १ ।।

प्रभो ! तुम बारहवें तीर्थंकर हो । तुम्हारे शरीर की छवि रक्तिम आभा लिये हुए है । हमें राग, द्वेष मात्सर्य और माया को छोड़कर तुम्हारा भजन करना चाहिए ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)