11एकादश तीर्थंकर
भगवान श्रेयांसनाथ
Shreyansnath
गैंडा
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- विष्णु
- तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
- विष्णा (विष्णुदेवी)
- तीसरे देवलोक सनत्कुमार में
- सिंहपुरी
- इक्ष्वाकुवंश
- ईश्वर (मनुज)
- मानवी (श्रीवत्सा)
- 76
- तिन्दुक
जीवन की तिथियाँ
- फाल्गुन कृ. 12
- श्रवण
- फाल्गुन कृ. 13
- 1000
- माघ कृ. 15
- दो मास
चिह्न, शरीर और आयु
- गैंडा (खंगी)
- 80 धनुष
- 21,00,000 वर्ष
- 84 लाख वर्ष
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- श्रावण कृ. 3
- 1,000
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री श्रेयांसनाथाय नमः ।
श्रेयांस जिनेश्वरू ! प्रणमूं नित बेकर जोड़ रे । मोक्ष मार्ग श्रेय शोभता, धार्या स्वाम श्रेयांस उदार रे । जे जे श्रेय वस्तु संसार में, ते ते आप करी अंगीकार रे । ते ते आप करी अंगीकार, श्रेयांस जिनेश्वरू ।..... ।। १ ।।
पूरी चौबीसी पढ़ें (7 गाथा) ›