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‹ चौबीस तीर्थंकर
11एकादश तीर्थंकर

भगवान श्रेयांसनाथ

Shreyansnath

चिन्हगैंडा
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
विष्णु
माता
विष्णा (विष्णुदेवी)
जन्म नगरी
सिंहपुरी
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
ईश्वर (मनुज)
यक्षिणी
मानवी (श्रीवत्सा)
गणधर
76
चैत्य वृक्ष
तिन्दुक

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं श्रेयांसनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री श्रेयांसनाथाय नमः ।

श्रेयांस जिनेश्‍वरू ! प्रणमूं नित बेकर जोड़ रे । मोक्ष मार्ग श्रेय शोभता, धार्या स्वाम श्रेयांस उदार रे । जे जे श्रेय वस्तु संसार में, ते ते आप करी अंगीकार रे । ते ते आप करी अंगीकार, श्रेयांस जिनेश्‍वरू ।..... ।। १ ।।

श्रेयांस प्रभो ! मोक्ष मार्ग के लिए जो श्रेय मा, उसे तुमने धारण किया । इस संसार में जो-जो श्रेय वस्तुएं थीं, उन सबको तुमने अंगीकार कर लिया ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)