प्रभु ! चन्द जिनेश्वर ! चन्द जिसा । हो प्रभु ! चंद जिनेश्वर चंद जिसा, वाणी शीतल चंद सी न्हाल हो । प्रभु ! उपशम रस जन सांभल्यां, मिटै करम भरम मोह जाल हो ।। १ ।।
प्रभो ! तुम्हारी वाणी चन्द्रमा की भांति शीतल और उपशम रस से भरी हुई है । जो व्यक्ति उसे सुनते हैं, उनके कर्म, भ्रम और मोहजाल दूर हो जाते हैं ।