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‹ चौबीस तीर्थंकर
8अष्टम तीर्थंकर

भगवान चंद्रप्रभ

Chandraprabh

चिन्हअर्धचंद्र
वर्णश्वेत

परिवार एवं संघ

पिता
महासेन
पिता की गति
दूसरे देवलोक ईशान में
माता
लक्ष्मणा
माता की गति
सिद्ध
जन्म नगरी
चंद्रपुरी
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
विजय (श्याम)
यक्षिणी
ज्वालामालिनी (भृकुटि)
गणधर
93
चैत्य वृक्ष
नाग (पुन्नाग)

जीवन की तिथियाँ

जन्म तिथि
पौष कृ. 12
नक्षत्र
अनुराधा
दीक्षा तिथि
पौष कृ. 13
दीक्षा साथी
1000
केवलज्ञान तिथि
फाल्गुन कृ. 7
छद्मस्थ काल
तीन मास

चिह्न, शरीर और आयु

लक्षण चिह्न
चन्द्रमा
शरीर मान
150 धनुष
साधक जीवन
1 लाख पूर्व 24 पुर्वांगकम
आयुमान
10 लाख पूर्व

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

निर्वाण तिथि
भाद्रपद कृ. 7
निर्वाण साथी
1,000
नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री चन्द्रप्रभाय नमः ।

प्रभु ! चन्द जिनेश्‍वर ! चन्द जिसा । हो प्रभु ! चंद जिनेश्‍वर चंद जिसा, वाणी शीतल चंद सी न्हाल हो । प्रभु ! उपशम रस जन सांभल्यां, मिटै करम भरम मोह जाल हो ।। १ ।।

प्रभो ! तुम्हारी वाणी चन्द्रमा की भांति शीतल और उपशम रस से भरी हुई है । जो व्यक्ति उसे सुनते हैं, उनके कर्म, भ्रम और मोहजाल दूर हो जाते हैं ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)