8अष्टम तीर्थंकर
भगवान चंद्रप्रभ
Chandraprabh
अर्धचंद्र
श्वेत
परिवार एवं संघ
- महासेन
- लक्ष्मणा
- चंद्रपुरी
- इक्ष्वाकुवंश
- विजय (श्याम)
- ज्वालामालिनी (भृकुटि)
- 93
- नाग (पुन्नाग)
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
नक्शे पर देखें ↗स्तुति
ॐ ह्रीं श्री चन्द्रप्रभाय नमः ।
प्रभु ! चन्द जिनेश्वर ! चन्द जिसा । हो प्रभु ! चंद जिनेश्वर चंद जिसा, वाणी शीतल चंद सी न्हाल हो । प्रभु ! उपशम रस जन सांभल्यां, मिटै करम भरम मोह जाल हो ।। १ ।।
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