8अष्टम तीर्थंकर
भगवान चंद्रप्रभ
Chandraprabh
अर्धचंद्र
श्वेत
परिवार एवं संघ
- महासेन
- दूसरे देवलोक ईशान में
- लक्ष्मणा
- सिद्ध
- चंद्रपुरी
- इक्ष्वाकुवंश
- विजय (श्याम)
- ज्वालामालिनी (भृकुटि)
- 93
- नाग (पुन्नाग)
जीवन की तिथियाँ
- पौष कृ. 12
- अनुराधा
- पौष कृ. 13
- 1000
- फाल्गुन कृ. 7
- तीन मास
चिह्न, शरीर और आयु
- चन्द्रमा
- 150 धनुष
- 1 लाख पूर्व 24 पुर्वांगकम
- 10 लाख पूर्व
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- भाद्रपद कृ. 7
- 1,000
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री चन्द्रप्रभाय नमः ।
प्रभु ! चन्द जिनेश्वर ! चन्द जिसा । हो प्रभु ! चंद जिनेश्वर चंद जिसा, वाणी शीतल चंद सी न्हाल हो । प्रभु ! उपशम रस जन सांभल्यां, मिटै करम भरम मोह जाल हो ।। १ ।।
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