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‹ चौबीस तीर्थंकर
8अष्टम तीर्थंकर

भगवान चंद्रप्रभ

Chandraprabh

चिन्हअर्धचंद्र
वर्णश्वेत

परिवार एवं संघ

पिता
महासेन
माता
लक्ष्मणा
जन्म नगरी
चंद्रपुरी
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
विजय (श्याम)
यक्षिणी
ज्वालामालिनी (भृकुटि)
गणधर
93
चैत्य वृक्ष
नाग (पुन्नाग)

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं चंद्रप्रभ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री चन्द्रप्रभाय नमः ।

प्रभु ! चन्द जिनेश्‍वर ! चन्द जिसा । हो प्रभु ! चंद जिनेश्‍वर चंद जिसा, वाणी शीतल चंद सी न्हाल हो । प्रभु ! उपशम रस जन सांभल्यां, मिटै करम भरम मोह जाल हो ।। १ ।।

प्रभो ! तुम्हारी वाणी चन्द्रमा की भांति शीतल और उपशम रस से भरी हुई है । जो व्यक्ति उसे सुनते हैं, उनके कर्म, भ्रम और मोहजाल दूर हो जाते हैं ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)