7सप्तम तीर्थंकर
भगवान सुपार्श्वनाथ
Suparshvanath
स्वस्तिक
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- प्रतिष्ठ (सुप्रतिष्ठ)
- दूसरे देवलोक ईशान में
- पृथ्वी
- सिद्ध
- वाराणसी
- इक्ष्वाकुवंश
- मातंग
- शान्ता
- 95
- शिरीष
जीवन की तिथियाँ
- ज्येष्ठ शु. 12
- विशाखा
- ज्येष्ठ शु. 13
- 1000
- फाल्गुन कृ. 6
- नौ मास
चिह्न, शरीर और आयु
- स्वस्तिक
- 200 धनुष
- 1 लाख पूर्व 20 पुर्वांगकम
- 20 लाख पूर्व
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- फाल्गुन कृ. 7
- 500
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री सुपार्श्वनाथाय नमः ।
भजियै नित्य स्वामी सुपास ए । सुपास सातमां जिणंद ए, ज्यांनै सेवै सुर नर वृंद ए । सेवक पूरण आश ए, भजियै नित्य स्वामी सुपास ए ।। १ ।।
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