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‹ चौबीस तीर्थंकर
7सप्तम तीर्थंकर

भगवान सुपार्श्वनाथ

Suparshvanath

चिन्हस्वस्तिक
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
प्रतिष्ठ (सुप्रतिष्ठ)
पिता की गति
दूसरे देवलोक ईशान में
माता
पृथ्वी
माता की गति
सिद्ध
जन्म नगरी
वाराणसी
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
मातंग
यक्षिणी
शान्ता
गणधर
95
चैत्य वृक्ष
शिरीष

जीवन की तिथियाँ

जन्म तिथि
ज्येष्ठ शु. 12
नक्षत्र
विशाखा
दीक्षा तिथि
ज्येष्ठ शु. 13
दीक्षा साथी
1000
केवलज्ञान तिथि
फाल्गुन कृ. 6
छद्मस्थ काल
नौ मास

चिह्न, शरीर और आयु

लक्षण चिह्न
स्वस्तिक
शरीर मान
200 धनुष
साधक जीवन
1 लाख पूर्व 20 पुर्वांगकम
आयुमान
20 लाख पूर्व

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

निर्वाण तिथि
फाल्गुन कृ. 7
निर्वाण साथी
500
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स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री सुपार्श्वनाथाय नमः ।

भजियै नित्य स्वामी सुपास ए । सुपास सातमां जिणंद ए, ज्यांनै सेवै सुर नर वृंद ए । सेवक पूरण आश ए, भजियै नित्य स्वामी सुपास ए ।। १ ।।

सुपार्श्‍व प्रभु ! तुम सातवें तीर्थंकर हो । देव और मनुष्य तुम्हारी उपासना कर रहे हैं । तुम उपासकों की आशा पूरी करने वाले हो ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)