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‹ चौबीस तीर्थंकर
6षष्ठ तीर्थंकर

भगवान पद्मप्रभ

Padmaprabh

पद्मप्रभु
चिन्हकमल
वर्णरक्त

परिवार एवं संघ

पिता
श्रीधर
माता
सुसीमा
जन्म नगरी
कौशाम्बी
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
कुसुम
यक्षिणी
श्यामा (अच्युता)
गणधर
107
चैत्य वृक्ष
छत्राभ (प्रियंगु)

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं पद्मप्रभ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री पद्मप्रभाय नमः ।

पदम प्रभू नित समरियै । निर्लेप पदम जिसा प्रभू, प्रभु पदम पिछाण । संयम लीधो तिण समै, पाया चोथो नाण ।। १ ।।

पद्म प्रभु ! तुम कमल की भांति निर्लिप्‍त थे । तुमने जिस क्षण साधुत्व स्वीकार किया, उसी क्षण तुम्हें मनःपर्यव ज्ञान प्राप्‍त हो गया ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)