भजियै नित्य स्वामी सुपास ए । सुपास सातमां जिणंद ए, ज्यांनै सेवै सुर नर वृंद ए । सेवक पूरण आश ए, भजियै नित्य स्वामी सुपास ए ।। १ ।।
सुपार्श्व प्रभु ! तुम सातवें तीर्थंकर हो । देव और मनुष्य तुम्हारी उपासना कर रहे हैं । तुम उपासकों की आशा पूरी करने वाले हो ।