प्रभु नेम स्वामी ! तूं जगनाथ अंतरयामी । रिठनेम स्वामी ! तूं जगनाथ अंतरयामी ।। तूं तोरण स्यूं फिर्यो जिन-स्वाम, अद्भुत बात करी तैं अमाम । प्रभु नेम-स्वामी ! तूं जगनाथ अंतरयामी ।। १ ।।
तुम विवाह-तोरण के पास जा लौट आये । यह अद्भुत और अनुपम काम किया तुमने ।