श्रीमाधोपुर का चौघड़िया
श्रीमाधोपुर, Rajasthan — सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार दिन और रात की चौघड़िया, राहुकाल तथा अन्य काल।
श्रीमाधोपुर की चौघड़िया सारणी
दिन की चौघड़िया
| चौघड़िया | समय | भाव |
|---|---|---|
| रोग | 06:09 – 07:43 | |
| उद्वेग | 07:43 – 09:17 | |
| चर | 09:17 – 10:51 | |
| लाभ | 10:51 – 12:25 | |
| अमृत | 12:25 – 13:59 | |
| काल | 13:59 – 15:32 | |
| शुभ | 15:32 – 17:06 | |
| रोग | 17:06 – 18:40 |
रात की चौघड़िया
| चौघड़िया | समय | भाव |
|---|---|---|
| काल | 18:40 – 20:06 | |
| शुभ | 20:06 – 21:33 | |
| रोग | 21:33 – 22:59 | |
| उद्वेग | 22:59 – 00:25 | |
| चर | 00:25 – 01:51 | |
| लाभ | 01:51 – 03:17 | |
| अमृत | 03:17 – 04:43 | |
| काल | 04:43 – 06:10 |
अन्य काल
- राहु काल
- काल वेला
- वार वेला
- काल रात्रि
आठ चौघड़िया और उनका अर्थ
- उद्वेग
- चर
- लाभ
- अमृत
- काल
- शुभ
- रोग
चौघड़िया क्या है
चौघड़िया दिन को आठ और रात को आठ भागों में बाँटने की एक पद्धति है। हर भाग का एक नाम है और उससे जुड़ा एक शुभ या अशुभ भाव। पश्चिमी और उत्तरी भारत में सामान्य कामों के लिए उपयुक्त समय देखने में इसका व्यापक प्रचलन है — यात्रा पर निकलना, दुकान खोलना, कोई नया अभ्यास आरंभ करना।
शब्द सामान्यतः "चौ" अर्थात् चार और "घड़ी" से बना माना जाता है। घड़ी लगभग चौबीस मिनट की प्राचीन इकाई है, इसलिए चार घड़ी यानी लगभग छियानवे मिनट — विषुव के दिन एक चौघड़िया इतनी ही लंबी होती है। शेष दिनों में यह घटती-बढ़ती रहती है, क्योंकि विभाजन घड़ी के घंटों का नहीं, वास्तविक दिनमान का होता है।
समय की गणना कैसे होती है
दिन का भाग सूर्योदय से सूर्यास्त तक होता है और उसे आठ बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। रात का भाग सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक चलता है और उसका विभाजन भी इसी प्रकार होता है। दिनमान और रात्रिमान प्रायः बराबर नहीं होते, इसलिए एक ही तिथि पर दिन की चौघड़िया और रात की चौघड़िया की लंबाई अलग-अलग रहती है।
किस भाग को कौन-सा नाम मिलेगा, यह वार पर निर्भर करता है — और वार की गणना मध्यरात्रि से नहीं, सूर्योदय से की जाती है। इसीलिए मंगलवार की चौघड़िया मंगलवार के सूर्योदय से आरंभ होकर उस रात्रि तक चलती है, जिसे घड़ी बुधवार का तड़का कहेगी।
नगर के अनुसार समय क्यों बदलता है
यहाँ सब कुछ सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित है, और वे स्थान के अनुसार बदलते हैं। एक ही तिथि पर लाडनूँ और कोलकाता के सूर्योदय में लगभग एक घंटे का अंतर होता है, इसलिए दोनों की चौघड़िया में भी उतना ही अंतर आ जाता है। एक ही सारणी पूरे देश के काम नहीं आ सकती — यही कारण है कि यह पृष्ठ प्रत्येक नगर के लिए अलग से प्रकाशित किया गया है।
समय उसी नगर के स्थानीय समय क्षेत्र में दिखाया जाता है, जिसकी गणना उसके अक्षांश और देशांतर से की गई है।
चौघड़िया और राहुकाल
राहुकाल एक अलग गणना है — दिनमान का एक निश्चित आठवाँ भाग, जो वार से तय होता है। उसे चौघड़िया के स्थान पर नहीं, उसके साथ देखा जाता है। कई बार वह ऐसे समय पर पड़ जाता है जिसे चौघड़िया शुभ बताती है; ऐसी स्थिति में सामान्य व्यवहार यही है कि उस समय को टाल दिया जाए।
इन विषयों में परंपराएँ एक-सी नहीं हैं और क्षेत्रीय पंचांगों में भी अंतर मिलता है। जिस परिवार या समाज में जो गणना मान्य हो, व्यवहार में वही रखनी चाहिए।
सामान्य प्रश्न
- श्रीमाधोपुर में एक दिन में कितनी चौघड़िया होती हैं?
- सबसे शुभ चौघड़िया कौन-सी मानी जाती है?
- श्रीमाधोपुर की चौघड़िया दूसरे नगर से अलग क्यों होती है?
- क्या वार मध्यरात्रि को बदलता है?