लय
जिस तर्ज़ पर गीतिका गाई जाती है। एक ही लय पर कई रचनाएँ होती हैं।
- संयममय जीवन हो
- दिल के अरमां
- मेरा जीवन कोरा कागज
- धर्म की लौ
- स्वामी भीखणजी रो नाम
- आरती
- धरती धोरां री
- चांदी की दीवार
- चांद चढ्यो गिगनार
- नीले घोड़े रा असवार
- जय बोलो संघ
- मेरा जीवन कोरा
- आपणै भागां री
- प्रभो! यह तेरापंथ महान
- जहां डाल-डाल पर
- जगाया तुमको कितनी बार
- तुम्हीं मेरे मन्दिर
- तेजा रे
- श्रद्धा स्वीकारो
- आने वाले कल
- क्या क्या पाना है
- बच्चे मन के सच्चे
- नैतिकता की सुर सरिता में
- घूमर
- तोता उड़ जाना
- ऐ मेरे वतन के लोगों
- आने वाले कल की
- धर्म की लौ जलाएं हम
- भावभीनी वन्दना
- तेजा
- ओम् अर्हम्
- है प्रीत जहां की रीत सदा
- आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं
- दिल करता
- रुणझुणियो
- हम होंगे कामयाब
- प्रभो! तुम्हारे पावन पथ पर
- शासन कल्पतरू
- कीर्तन
- धर्म की लौ जलाएं
- खड़ी नीम के नीचे
- मिलो न तुम तो
- कल्पित
- इक परदेशी मेरा दिल ले गया
- चदरिया
- स्वामीजी थांरी साधना री
- चिरमी
- घुंघरू छम छमा छम
- ऋषिराज तुम्हारे
- जवाहरलाल बनेंगे हम
- जय बोलो
- जय बोलो संघ सितारे की
- जय बोलो महावीर स्वामी की
- महाप्राण गुरूदेव
- मांड
- वार्षिक मर्यादोत्सव आया
- सावण आयो रे