‹ मंत्र उपाय
सम्पदा (२)
हो प्रभु ! लीन पणै तुम ध्यावियां पामै इन्द्रादिक नीं ऋद्धि हो बलि विविध भोग सुख सम्पदा लहै आमोसही आदि लब्धि हो
- भौतिक उलझन
- प्रतिदिन १ माला
- ऐहिक और पारलौकिक सम्पदा प्राप्त करता है