‹ मंत्र उपाय
दृष्टिदोष-निवारक (१)
बुद्धस्त्वमेव विबुधार्चितबुद्धि-बोधात् त्वं शंकरोऽसि भुवनत्रय-शंकरत्वात् धाताऽसि धीर ! शिवमार्गविधेर्विधानात् व्यक्तं त्वमेव भगवन् ! पुरुषोत्तमोऽसि
- प्रतिदिन १ माला
- दृष्टिदोष का निवारण होता है । इस मंत्र के प्रयोक्ता पर अग्नि का असर नहीं होता