Skip to content
‹ Prashnottar

भवी-अभवी पुच्छा

  1. Q 1. भवी अभवी कौन होते हैं?

    जिन जीवों में मोक्ष जाने की योग्यता होती है वे जीव भवी कहलाते हैं। जिन जीवों में मोक्ष गमन की योग्यता नहीं होती वे जीव अभवी कहलाते हैं।

  2. Q 2. सब भवी जीव मुक्त हो जाएंगे तो क्या संसार एक दिन भवी जीवों से शून्य हो जाएगा?

    नहीं। जो मोक्ष जाएंगे वे भवी होंगे, पर सब भवी जीव मोक्षनहीं जाएंगे।

  3. Q 3. भवी हैं, मुक्त होने की योग्यता रखते हैं फिर मुक्त क्यों नहीं होंगे।

    इस बात को एक उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे—पत्थर में प्रतिमा बनने की योग्यता है पर सब पत्थर प्रतिमा का आकार नहीं ले सकते। जिन पाषाण खण्डों को शिल्पी का योग नहीं मिलता वे योग्य होने पर भी प्रतिमा का रूप नहीं ले पाएंगे। इसी प्रकार जिन भवी जीवों को उपयुक्त वातावरण—द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव, पुरुषार्थ, मार्गदर्शक आदि का योग नहीं मिलेगा वे कभी मुक्त नहीं होंगे। परिणामस्वरूप संसार भवी जीवों से शून्य नहीं होगा।

  4. Q 4. अभवी जीव कभी मुक्त होंगे ही नहीं—क्या इस बात को भी किसी उदाहरण से समझा जा सकता है?

    इस बात को समझने के लिए हम कोरडू धान्य का उदाहरण लें। कोरङू धान्य को कितना ही अग्नि पर चढ़ाया जाए वह बिल्कुल भी पकेगा नहीं, ठीक इसी तरह अभवी जीव को कितना भी उपयुक्त वातावरण मिले उसकी चेतना में सम्यक्त्व का बीज अंकुरित नहीं हो सकता।

  5. Q 5. क्या कभी भवी का अभवी और अभवी का भवी बन सकता है?

    नहीं। ये दोनों शाश्वतभाव हैं।

  6. Q 6. अभवी सम्यक्त्वी होता है या मिथ्यात्वी?

    अभवी मिथ्यात्वी ही होता है। उसे कभी भी सम्यक्त्व नहीं आ सकती।

  7. Q 7. अभवी के सकाम निर्जरा होती है या अकाम?

    मोक्ष प्राप्ति और आत्मशुद्धि का लक्ष्य न होने के कारण अभवी के सकाम निर्जरा नहीं होती। उसके जो बीच-बीच में आंशिक उज्ज्वलता होती है वह अकाम निर्जरा से होती है।

  8. Q 8. क्या अभवी साधु बन सकता है?

    व्यवहार में साधुवेश धारण कर सकता है पर निश्चय में उसकी आत्मा में साधुत्व का स्पर्श नहीं होता।

  9. Q 9. अभवी साधुवेश क्यों स्वीकार करता है?

    पूजा-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, ऋद्धि आदि की प्राप्ति के लिए।

  10. Q 10. क्या अभवी तीर्थकर के समवसरण में जा सकता है?

    नहीं।