जैन आगमों (सूत्रों) के नाम
11 अंग सूत्र, 12 उपांग सूत्र, 4 मूल सूत्र, 4 छेद सूत्र, 1 आवश्यक सूत्र (कुल 32)
11 अंग सूत्र
1.आचारांग
2.सूत्रकृतांग
3.स्थानांग
4.समवायांग
5.भगवती
6.ज्ञाताधर्मकथा
7.उपासकदशा
8.अन्तकृत्दशा
9.अनुत्तरोपपातिकदशा
10.प्रश्नव्याकरण
11.विपाकसूत्र
12 उपांग सूत्र
1.औपपातिक
2.राजप्रश्नीय
3.जीवाभिगम
4.प्रज्ञापना
5.जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति
6.चन्द्रप्रज्ञप्ति
7.सूर्यप्रज्ञप्ति
8.निरयावलिका
9.कल्पवतंसिका
10.पुष्पिका
11.पुष्पचूलिका
12.वृष्णिदशा
4 मूल सूत्र
1.दशवैकालिक
2.उत्तराध्ययन
3.अनुयोगद्वार
4.नन्दी
4 छेद सूत्र
1.निशीथ
2.व्यवहार
3.बृहत्कल्प
4.दशाश्रुतस्कन्ध
1 आवश्यक सूत्र
1. प्रतिक्रमण सूत्र ।
नोट : भगवान की मूल वाणी आगम सूत्र कहलाती है, उत्तरवर्ती आचार्यों के द्वारा जो ग्रन्थ तैयार किए गये हैं, वे शास्त्र कहलाते हैं ।
अर्हतों के अनुभवों का आगमों में सार है ।
वह हमारी साधना का प्राणमय आधार है ।
सूत्र आगम, अर्थ आगम, तदुभयागम् रम्य है ।
विविध नय की दॄष्टियों से सहज, सरल, सुगम्य है ।
—आचार्य तुलसी