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जैन धर्म परिचय

जैन धर्म के ह्रास के हेतु

जैन—धर्म के ह्रास के हेतु

1.बाह्य कर्मकांडों की प्रचुरता, शक्ति पूजा का अभाव ।

2.व्यक्तिवादी मनोवृत्ति—दूसरों की हानि से मुझे क्या ? मैं दूसरों के लिए कर्म क्यों बांधूं ।

3.प्रभावशाली आचार्यों का लम्बा व्यवधान ।

4.अन्य धर्मों का बढ़ता हुआ प्रभाव ।

5.राज्याश्रय का मनोभाव ।

6.अहिंसा आदि नियमों की कठोरता ।

7.नृत्यादि मनोरंजकता का अभाव ।