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जैन धर्म परिचय

जैन धर्म परिचय

राग—द्वेष को जीतने वाले महापुरुष को जिन कहते हैं । जिन को भगवान मानने वाले भक्त जैन कहलाते हैं तथा जिन भगवान के द्वारा जो धर्म प्रवर्तित होता है उसका नाम जैन धर्म है । तीर्थंकर का एक अर्थ है प्रवचन, भगवद्—वाणी । दूसरा अर्थ है—साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका रूप चतुर्विध धर्म—संघ । उसकी स्थापना करने वाले तीर्थंकर कहलाते हैं । तीर्थंकर को भगवान, जिन, अर्हत्, देवाधिदेव आदि कहा जाता है । इस अवसर्पिणी काल में भगवान ऋषभ प्रथम तीर्थंकर हुए तथा भगवान महावीर अन्तिम । इनमें 22 तीर्थंकर इक्ष्वाकुवंशीय थे । केवल दो हरिवंशीय (मुनिसुव्रत प्रभु एवं अरिष्‍टनेमि प्रभु) हुए ।