तीर्थंकर का सामान्य वर्णन
1.सब तीर्थंकर एक देव—दूष्य वस्त्र से दीक्षित हुए ।
2.विहार क्षेत्र—ऋषभ, अरिष्टनेमि, पार्श्व और महावीर ये चार अनार्य क्षेत्र में भी विचरे, शेष केवल आर्य क्षेत्र में ।
3.ज्ञानोत्पाद—23 तीर्थंकरों को नये सूर्य की नई किरणों के साथ एक रात्रिक प्रतिमा में कैवल्य प्राप्त हुआ । महावीर को सायं ।
4.किस तपस्या में ज्ञान पाया ? वासुपूज्य ने—1 उपवास में । पार्श्व, ऋषभ, अरनाथ, मल्लि—तेले में । शेष ने बेले में ।
5.तीर्थ—स्थापन—23 तीर्थंकरों ने तीर्थ—स्थापन प्रथम समवसरण में किया, महावीर ने दूसरे में ।
6.राजगृह में प्रवास—राजगृह में 23 तीर्थंकरों का शुभागमन व समवसरण हुआ, सिवाय वासुपूज्य प्रभु के ।
7.सुमति साहार दीक्षित हुए । वासुपूज्य उपवास से, पार्श्व, मल्लि तीन उपवास (तेले) से । शेष सब दो उपवास (बेले) से दीक्षित हुए ।
महावीर—वाणी
संयम गोयम ! मा पमायए
क्षण मात्र प्रमाद मत करो ।
पढ़मं नाणं तओ दया
पहले ज्ञान फिर दया—आचरण ।
नापुट्ठो वागरे किंची, पुट्ठो वा नलियं वए—
बिना पूछे मत बोलो और पूछने पर असत्य मत बोलो ।
कोहं असच्चं कुब्वेज्जा—
क्रोध को निष्फल करो ।
सच्चम्मि धिई कुव्वहा—
सत्य पर डटे रहो ।