‹ मंगल साधना
पौषध-पाठ (हिन्दी)
ग्यारहवां पौषध—व्रत ।
1.अशन—पान—खादिम—स्वादिम का प्रत्याख्यान ।
2.अब्रह्मचर्य का प्रत्याख्यान ।
3.मणि, सुवर्ण आदि का प्रत्याख्यान ।
4.माला, रंग विलेपन का प्रत्याख्यान ।
5.शस्त्र, मूसल आदि का, सावद्य व्यापार का प्रत्याख्यान ।
दिन—रात पर्यन्त इस पौषध व्रत का मैं पालन करूंगा ।
दो करण तीन योग से सावद्य व्यापार न करूंगा, न कराऊंगा, मन से, वचन से और काया से ।।
नोट :पानी पीकर पौषध व्रत लेते समय ‘दसवां देशावकाशिक’ व्रत बोलें । शेष विधि पूर्ववत् है ।