‹ मंगल साधना
सायंकालीन वन्दना
युग प्रणेता, युग प्रचेता, युग पुरुष लो वन्दना ।
विनयनत बद्धांजलि हम, कर रहे अभिवन्दना ।।
धन्य है सौभाग्य तुम से, कुशल अनुशास्ता मिले ।
दिव्यजीवन पा तुम्हीं से, भव्य शतदल हैं खिले ।।
तपो युग—युग धर्म शासक, जय विजय पग—पग वरो ।
तुम्हीं नैया के खेवैया, पार भव जल से करो ।।
जानूं जीव अजीव मैं, पुण्य—पाप की बात ।
आश्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष विख्यात ।।