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मंगल साधना

सामायिक पाठ

करेमि भंते ! सामाइयंहे भगवान ! मैं सामायिक करता हूं

सावज्जं जोगंसावद्य योग (पापकारी प्रवृत्ति) का

पच्चक्खामिप्रत्याख्यान (त्याग) करता हूं ।

जाव—नियमंसामायिक का जितना काल है

(मुहुत्तं एगं)(एक मुहूर्त) तक (48 मिनट)

पज्जुवासामिमैं उपासना करता हूं ।

दुविहंदो करण (करना, कराना)

तिविहेणं तीन योग से (मन, वचन, काया)

न करेमि न करूंगा

न कारवेमिन कराऊंगा

मणसामन से

वयसावचन से

कायसाकाया (शरीर) से

तस्सउन पूर्वकृत पापों से

भंते ।हे भगवन !

पडिक्कमामिनिवृत्त होता हूं ।

निंदामिनिन्दा करता हूं (आत्म—साक्षी से)

गरिहामिगुरु—साक्षी से आलोचना करता हूं

अप्पाणं वोसिरामिआत्मा को पाप से दूर करता हूं ।