‹ मंगल साधना
वंदन पाठ
तिक्खुत्तो—तीन बार
आयाहिणं—मैं दायीं ओर से दायीं ओर तक
पयाहिणं करेमि—प्रदक्षिणा करता हूं।
वंदामि—स्तुति करता हूं।
नमंसामि—नमस्कार करता हूं।
सक्कारेमि—सत्कार करता हूं।
सम्माणेमि—सम्मान करता हूं।
कल्लाणं—आप कल्याणकारी हैं।
मंगलं—आप मंगलकारी हैं।
देवयं—आप धर्मदेव हैं।
चेइयं—आप ज्ञानवान् हैं।
पज्जुवासामि—मैं आपकी पर्युपासना करता हूं।
मत्थएण वंदामि—मैं मस्तक झुकाकर वंदना करता हूं।
विधि—खड़े-खड़े तीन बार मौन प्रदक्षिणा कर घुटनों के बल बैठकर 'वंदामि नमंसामि से मत्थएण वंदामि' तक के पाठ का सस्वर उच्चारण करें। मत्थएण वंदामि उच्चारण के साथ मस्तक झुकाते हुए पंचांग वंदना करें। पंचांग वंदना अर्थात् दो हाथ, दो घुटने एवं सिर—ये पांच अंग जमीन का स्पर्श करें।