‹ मंगल साधना
यावज्जीवन का अनशन
देह शक्ति क्षीण होते देखकर या आयुष्य निकट आया जानकर साधु, साध्वी या श्रावक, श्राविका की साक्षी से यावज्जीवन अनशन किया जाता है । पूर्वाभिमुख होकर या जिस दिशा में आचार्य देव विराजमान हों उस दिशा में वन्दनासन में वन्दना करके यथाशक्ति तिविहार, चौविहार प्रत्याख्यान कर अनशन करना चाहिए ।