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प्रेक्षा और अनुप्रेक्षा

चित्त चंचल क्यों होता है ?

लक्ष्यहीन जीवन जीने से ।

कृत्रिम जीवन—व्यवहारों से ।

कषाय के योग व आसक्ति से ।

भौतिक आकर्षणों की अधिकता से ।

जीवन में आध्यात्मिकता की कमी से ।

वृत्तियों का बिना विवेक के दमन करने से ।

भूतकाल के अश्रेयस्कर प्रसंगों के चिन्तन एवं चिन्ता से ।

भविष्य की अस्वाभाविक व असम्यक् कल्पनाओं व आकांक्षाओं से ।