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प्रेक्षा और अनुप्रेक्षा

प्रेक्षा संगान

प्रेक्षा श्रद्धां यायात्—प्रेक्षा श्रद्धा की कोटि में पहुंचे ।

श्रद्धा वीर्यं यायात्—श्रद्धा पराक्रम की कोटि में पहुंचे ।

वीर्यं चरणं यायात्—पराक्रम आचरण की कोटि में पहुंचे ।

अन्तर्भावे मे, चिन्तायां मे—मेरे अन्तःकरण में, मेरे चिन्तन में ।

आचरणे में, व्यवहारे में—मेरे आचरण में, मेरे व्यवहार में ।

समता भूयात्, समता भूयात्—समता हो, समता हो ।

नवसूर्यो मे उदयं यायात्—मेरे जीवन में नया सूरज उगे ।

उदयं यायात्—नये प्रभात का उदय हो ।

तेजो लेश्या उदयं यायात्—मेरे जीवन में तेजो लेश्या प्रकट हो ।

उदयं यायात्—अध्यात्म की किरणें फूटें ।