विवेक पड़िमा (प्रतिमा)
महाप्राण ध्वनि 9 बार, कायोत्सर्ग पांच मिनट
अनुचिन्तन करें—
1.मैं क्रोध नहीं हूं—क्रोध मेरा स्वभाव नहीं है ।
2.मैं मान नहीं हूं—मान मेरा स्वभाव नहीं है ।
3.मैं माया नहीं हूँ—माया मेरा स्वभाव नहीं है ।
4.मैं लोभ नहीं हूं—लोभ मेरा स्वभाव नहीं है ।
5.मैं भय नहीं हूं—भय मेरा स्वभाव नहीं है ।
6.मैं शोक नहीं हूं—शोक मेरा स्वभाव नहीं है ।
7.मैं घृणा नहीं हूं—घृणा मेरा स्वभाव नहीं है ।
8.मैं काम नहीं हूं—काम मेरा स्वभाव नहीं है ।
9.मैं मिथ्यात्व नहीं हूं—मिथ्यात्व मेरा स्वभाव नहीं है ।
अतीत का प्रतिक्रमण करें—
1.यदि मैंने क्रोध किया हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।
2.यदि मैंने मान किया हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।
3.यदि मैंने माया की हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।
4.यदि मैंने लोभ किया हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।
5.यदि मैंने भय का संवेदन किया हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।
6.यदि मैंने शोक किया हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।
7.यदि मैंने घृणा की हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।
8.यदि मैंने काम का आसेवन किया हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।
9.यदि मैंने मिथ्यात्व का व्यवहार किया हो तो मनसा वाचा कर्मणा तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ।