‹ श्रावक साधना
किस गति से कितने मोक्ष ?
प्रथम, द्वितीय, तृतीय नरक से जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—10
चतुर्थ से—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—4
भवनपति देव—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—10
भवनपति देवियां—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—5
पृथ्वी, अप्काय—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—4
वनस्पतिकाय—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—6
पंचेन्द्रिय तिर्यंच—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—10
मनुष्य—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—20
मनुष्य स्त्री—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—10
पंचेन्द्रिय तिर्यंच स्त्री—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—10
वाणव्यंतर देव—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—10
वाणव्यंतर देवियां जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—10
ज्योतिषी देवी—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—10
ज्योतिषी देव—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—20
वैमानिक देव जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—108
वैमानिक देवियां—जघन्य—1,2,3 / उत्कृष्ट—20
पण्णवणा पद—20वां
नोट—अनन्तर भव से