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श्रावक साधना

तुंगिया नगरी के श्रावकों के कुछ लक्षण

1.वे आर्थिक दॄष्‍टि से सम्पन्‍न और दीप्तिमान थे ।

2.उनके आश्रय में अनेक व्यक्ति जीवनयापन करते थे ।

3.समाज में उनका विशेष प्रभाव था । वे किसी से पराभूत नहीं थे ।

4.वे जीव अजीव आदि नौ तत्त्वों के विशेषज्ञ थे ।

5.निर्ग्रन्थ प्रवचन में उन्हें किसी प्रकार की शंका नहीं होती थी ।

6.वे किसी चमत्कार को देखकर भी अन्य दर्शन में जाने की आकांक्षा नहीं करते थे ।

7.उनका रोम—रोम निर्ग्रन्थ प्रवचन में अनुरक्त था ।

8.उनके द्वार सदा साधुओं के लिए खुले रहते थे ।

9.वे अष्‍टमी चतुर्दशी अमावस्या और पूर्णिमा को प्रतिपूर्ण पौषध व्रत करते थे ।

10.वे श्रमण निर्ग्रन्थों को विधिवत अशनपान आदि सब प्रकार का दान देते थे ।

(भगवती सूत्र 2/5/सूत्र 94)