मुणिन्द मोरा
1.मुणिन्द मोरा, भिक्षु नैं भारीमाल,
वीर गोयम—सी जोड़ी रे, स्वामी मोरा ।
अति भली रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, चोथा आरा नी चाल,
विविध मर्यादा बांधी रे, स्वामी मोरा ।
निरमली रे, मोरा स्वाम ।।
2.मुणिन्द मोरा, आप मांहि तथा गण में जाण,
सुध संजम जाणो तो रे, स्वामी मोरा ।
रहिवो सही रे मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, ठागां सू रहिवा रा पचखाण,
बलि अनन्त सिद्धां री साखे रे, स्वामी मोरा ।
सम रही रे, मोरा स्वाम ।।
3.मुणिन्द मोरा, अवगुण बोलण रा त्याग,
गण में अथवा बाहिर रे, स्वामी मोरा ।
बिहुं तणे रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, मुनिवर जे महाभाग,
ए मर्याद आराधे रे, स्वामी मोरा ।
हित घणे रे, मोरा स्वाम ।।
4.मुणिन्द मोरा, तीजे पट ऋषिराय,
खेतसीजी सुखकारी रे, स्वामी मोरा ।
मुनि—पिता रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, सम दम उदधि सुहाय,
हेम हजारी भारी रे, स्वामी मोरा ।
गुण रता रे, मोरा स्वाम ।।
5. मुणिन्द मोरा, जयजश करण जिहाज,
दीप गणी दीपक—सा रे, स्वामी मोरा ।
महामुनी रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, गणपति में सिरताज,
विदेह क्षेत्र प्रगटिया रे, स्वामी मोरा ।
महाधुनी रे, मोरा स्वाम ।।
6.मुणिन्द मोरा, अमियचन्द अणगार,
महातपसी वैरागी रे, स्वामी मोरा ।
गुणनिलो रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, जीत सहोदर सार,
भीम जबर जयकारी रे, स्वामी मोरा ।
अति भलो रे, मोरा स्वाम ।।
7.मुणिन्द मोरा, कोदर तपसी करूर,
रामसुख ऋषि रूड़ो रे, स्वामी मोरा ।
राजतो रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, शिव—दायक शिव—सूर,
सतीदास सुखकारी रे, स्वामी मोरा ।
गाजतो रे ! मोरा स्वाम ।।
8.मुणिन्द मोरा, उभय पिथल वर्धमान,
साम राम युग बन्धव रे, स्वामी मोरा ।
नेम सूं रे, मोरा स्वाम ।
मुणिन्द मोरा, हीर बखत—गुण—खान,
थिरपाल फतेचंद जपियै रे, स्वामी मोरा ।
प्रेम सूं रे, मोरा स्वाम ।
9.मुणिन्द मोरा, टोकर ने हरनाथ,
अखैराम सुखरामज रे, स्वामी मोरा ।
ईश्वरू रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, राम सम्भू शिव साथ,
जवान मोती जाचा रे, स्वामी मोरा ।
दमीश्वरू रे, मोरा स्वाम ।।
10.मुणिन्द मोरा, इत्यादिक बहु सन्त,
बलि समणी सुखकारी रे, स्वामी मोरा ।
दीपती रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, कल्लू महा गुणवन्त,
तीन बन्धव नीं माता रे, स्वामी मोरा ।
जीपती रे, मोरा स्वाम ।।
11.मुणिन्द मोरा, गंगा नैं सिणगार,
जेतां दोलां जाणी रे, स्वामी मोरा ।
महासती रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, जोतां महा जश धार,
चम्पा आदि सयाणी रे, स्वामी मोरा ।
शोभती रे, मोरा स्वाम ।।
12.मुणिन्द मोरा, शासण महा—सुखकार,
अमर सुरी अधिष्ठायक रे, स्वामी मोरा ।
दायका रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, दवदन्ती जयवन्ती सार,
अनुकूल बलि इन्द्राणी रे, स्वामी मोरा ।
सहायका रे, मोरा स्वाम ।।
13.मुणिन्द मोरा, उगणीसै चवदै उदार,
कार्तिक सुदि तिथि दशमी रे, स्वामी मोरा ।
गाइयो रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, ‘जय—जश’ सम्पति सार,
बीदासर सुखसाता रे, स्वामी मोरा ।
पाइयो रे, मोरा स्वाम ।।
रचयिता : श्रीमज्जयाचार्य
लय : साहिब मोरा ए....