दोसावहारदक्खो, नालीयायार वियासगोपसरो रयणत्तयस्स जणओ पासजिणो जयउ जयचक्खु
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नवग्रह निवारण पार्श्व स्तोत्र
कय कुवलय पडिबोहो हरिणंकिय विग्गहो कला निलओ विहिआरविंद महणो दिअराओ जयइ पास जिणो
कंतीइ णिज्जिणिंतो सिंदूरं पुहइनंदणो कुरो जयजंतु अमयवक्को सुमंगलो जयइ पास जिणो
उप्पलदल नीलरुई हरिमंडल संथुओ इलाणंदो रयणिअरदारओ मह बुहो पसीइज्ज पास पहू
नाहिअवाय विअड्ढो नायत्थो नायरायकयपूओ सिरिपासनाह देवो देवायरिओ सिवं दिसउ
रायावट्टसमुज्जल तणुप्पहा मंडलो महाभूई असुरेहिं नमिज्जंतो पास जिमिंदो कई जयउ
तिमिरासी समारूढो संतो दुक्खावहो जयम्मि थिरो बहुल तमासरिससिरी,जय चक्खु सुओ जयई पासो
कवलीकय दोसायर मायंड रहं अहो तणु विमुक्कं लोआभरणी भूअं पास जिणं सत्तमं सरह
दुरिआइं पासनाहो सिहावमालिअनहो भुवणकेऊ दूरे तमरासीओ सत्तमट्ठाणट्ठिओ हरउ
इअ नवगहथुइगब्भं जिणपहसूरिहिं गुंफिअं थवणं तुह पास ! पढइ जो तं असुहा वि गहा न पीडंति