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तिक्खुत्तो आयाहिणं – गुरु वंदना पाठ

तिक्खुत्तो आयाहिणं – गुरु वंदना पाठ, जैन परंपरा का एक अत्यंत श्रद्धापूर्ण और महत्वपूर्ण पाठ है। इस पाठ में गुरु के प्रति तीन बार प्रदक्षिणा, वंदना, नमस्कार, सत्कार और उपासना की भावना व्यक्त की जाती है। पंचांग वंदना जैन धर्म की एक पवित्र क्रिया है, जिसमें पांच अंग (दो घुटने, दो हथेलियां और माथा) जमीन को छूते हैं। यह गुरु के प्रति परम विनम्रता को दर्शाता है।

परंपरागत

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तिक्खुत्तो आयाहिणं पयाहिणं करेमि वंदामि नमंसामि सक्कारेमि सम्माणेमि कल्लाणं मंगलं देवयं चेइयं पज्जुवासामि मत्थएणं वंदामि

Three times. From the right side (to the left) Circumambulation. I do / I perform. I bow with my head in reverence. I bow respectfully. I show respect. I give honour. You are the embodiment of welfare. You are the embodiment of auspiciousness. You are divine. You are worthy of worship. I worship you.