2121th Tirthankar
भगवान नमिनाथ
Naminath
नीलकमल
स्वर्ण
Family & Sangha
- विजय
- वप्रा (विप्रा)
- मिथिला
- इक्ष्वाकुवंश
- भृकुटि
- गान्धारी
- 17
- बकुल
Nirvana place
सम्मेद शिखर
View on map ↗Stuti
ॐ ह्रीं श्री नमिनाथाय नमः ।
प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे । मुझ प्यारा प्राण आधारा ।। नमिनाथ अनाथां रा नाथो रे, नित्य नमण करूं जोड़ी हाथो रे । कर्म काटण वीर विख्यातो, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे ।। १ ।।
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