11th Tirthankar
भगवान ऋषभदेव
Rishabhdev
वृषभ
स्वर्ण
Family & Sangha
- नाभिराय
- मरुदेवी
- अयोध्या
- इक्ष्वाकुवंश
- गोमुख
- चक्रेश्वरी
- 84
- न्यग्रोध (वट)
Nirvana place
अष्टापद
View on map ↗Stuti
ॐ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नमः ।
प्रणमूं प्रथम जिनन्द नैं जय जय जिन चंदा ।। वन्दु बेकर जोड़ नैं, जुग आदि जिनिन्दा । कर्म-रिपु-गज ऊपरै, मृगराज मुनिन्दा ।। १ ।।
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