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तेजा रे

आऊखे री घड़ियां थांरी घटती ही ज्यावै हो

Aukhe Ri Ghadiyan Thanri Ghatti Hi Jyavai Ho

राकेश मुनि · तेजा रे

गीत क्रमांक2938

आऊखे री घड़ियां थांरी घटती ही ज्यावै हो — Lyrics

आऊखे री घड़ियां थांरी घटती ही ज्यावै हो, करलै कमाई धर्म ध्यान री। समय जो बीत ज्यावै पाछो नहीं आवै हो, ज्योति जगालै अन्तर ज्ञान री।।

सांस रे धागां स्यूं बण्यो जिन्दगी रो हार हो, टूटण में लागै नहीं देर हो। मन मोहक तसवीर थांरै तन री हो, बणसी आखिर माटी रो ढेर हो।।

आर्त्त रौद्र ध्यान रो मिटाले अंधारो हो, चाँद उगाले समता भाव रो। कर्योड़ा करमां रो फल भोगणो ही पड़सी हो, करलै उजाळो मंगल भाव रो।।

एकलो ही आयो है तूं एकलो ही जासी हो, साथ न जासी एक तार हो। मोह री मदिरा नै पी बण्यो क्यूं तू बावलो, पापां रो बांधे सिर क्यूं भार हो।।

आतमा री चादर नै ऊजली बणाले हो, संयम री साबण लेकर हाथ में। धूंओं राग-द्वेष रो उड़ै है च्यारूं ओर हो, रहजै सावधान दिन रात में।।

धर्म रे मारग में बढ़तो ही रहजे हो, मन में तूं रखजै निर्मल भावना। मुनि ‘राकेश’ बेड्यां टूट्यां कर्मा री हो, होसी सफल थांरी कामना।।

  1. 1.Aaukhe Ri Ghadiya Thaari Ghatati Hi Jyave Ho
  2. 2.यह प्रेरणादायक गीत जीवन की नश्वरता और समय के महत्व को समझाने वाला आध्यात्मिक संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है, इसलिए उसे धर्म, ध्यान और आत्मजागृति में लगाना चाहिए। गीत मनुष्य को मोह, राग-द्वेष और पाप से दूर रहकर समता, संयम और निर्मल भावनाओं को अपनाने की प्रेरणा देता है, जिससे जीवन सार्थक और सफल बन सके।

Roman Transliteration

aukhe ri ghadiyan thanri ghatti hi jyavai ho, karlai kamai Dharm dhyan ri. samay jo bit jyavai pachho nahin avai ho, jyoti jagalai antar jnan ri..

sans re dhagan syun banyo jindagi ro har ho, tutan men lagai nahin der ho. man mohak tasvir thanrai tan ri ho, bansi akhir mati ro dher ho..

artta raudra dhyan ro mitale andharo ho, chand ugale samta bhav ro. karyoda karman ro phal bhogno hi padsi ho, karlai ujalo Mangal bhav ro..

ekalo hi ayo hai tun ekalo hi jasi ho, sath n jasi ek tar ho. moh ri madira nai pi banyo kyun tu bavlo, papan ro bandhe sir kyun bhar ho..

atama ri chadar nai ujali banale ho, sanyam ri saban lekar hath men. dhunon rag-dvesh ro udai hai chyarun or ho, rahjai savdhan din rat men..

Dharm re marag men badhto hi rahje ho, man men tun rakhjai nirmal bhavna. Muni ‘rakesh’ bedyan tutyan karma ri ho, hosi saphal thanri kamna..

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