मुख्य सामग्री पर जाएँ
धर्म की लौ जलाएँ

भिक्षु है इमरत रो झरणो

Bhikshu Hai Imarat Ro Jharno

साध्वी फूलकुमारी जी (लाडनूं) · धर्म की लौ जलाएँ

गीत क्रमांक2943

भिक्षु है इमरत रो झरणो — Lyrics

भिक्षु है इमरत रो झरणो। जनम मरण री पीर निवारण, है साचो शरणो।।

सुमिरण करयां कटै संकट, दुःख गल्या लारली जावै, काळी काळी राता में भी, स्वतः उजासो आवै। पितवाणी पूरी करली अब, और न कुछ करणो।।

पल-पल पग-पग पर रखवाळो, प्राण पियारो म्हारो, एक शब्द में कहूं अगर, गिरतां रो सबल सहारो। बणग्यो जिण रै प्राण देव, बीं-रो निश्चित तिरणो।।

मीरां रै घनश्याम राम है, ज्यूं प्रभु भिक्षु म्हारै, रोम-रोम नस-नस में बसिया, अब म्है किण रै सारै। चाहै आवै तूफानी अंधड़, भी नहीं डरणो।।

  1. 1.Bhikshu Hai Imrat Ro Jharno
  2. 2.यह भजन “भिक्षु है इमरत रो झरणो” साध्वी फूलकुमारी जी द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण स्तुति है। इसमें आचार्य भिक्षु के गुणों का सरल और सुंदर वर्णन किया गया है। यह भजन बताता है कि उनके स्मरण से जीवन के दुख दूर होते हैं और मन को सच्चा सहारा मिलता है। इसमें भक्ति, विश्वास और आत्मिक शांति का संदेश है।

Roman Transliteration

Bhikshu hai imarat ro jharno. janam maran ri pir nivaran, hai sacho sharno..

sumiran karyan katai sankat, duhkh galya larli javai, kali kali rata men bhi, svatah ujaso avai. pitvani puri karli ab, aur n kuchh karno..

pal-pal pag-pag par rakhvalo, pran piyaro mharo, ek shabda men kahun agar, girtan ro sabal saharo. banagyo jin rai pran Dev, bin-ro nishchit tirno..

miran rai ghanashyam Ram hai, jyun Prabhu Bhikshu mharai, rom-rom nas-nas men basiya, ab mhai kin rai sarai. chahai avai tuphani andhad, bhi nahin darno..

← लय: धर्म की लौ जलाएँ← अनुक्रमणिका