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लय: जहां डाल-डाल पर
Jahan Dal-Dal Par
इस लय पर 6 रचनाएँ।
[१५]
[15]
गुरु महाप्रज्ञ का नाम
Guru Mahapragya Ka Nam
दुःख में तूं धीरज धर रे
Duhkh Men Tun Dhiraj Dhar Re
धरती के बन गए देवता, क्या गुण गरिमा गाएँ
Dharti Ke Ban Gae Devta, Kya Gun Garima Gaen
धर्मचक्री! दी तुमने भैक्षव गण को अमित ऊंचाई।
Dharmachakri! Di Tumne Bhaikshav Gan Ko Amit Unchai.
नया सृजन करने वाली, हम नवयुग की बालाएं।
Naya Srijan Karne Vali, Ham Navyug Ki Balaen.