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पाँचू परमेष्ठी प्यारा

परमेष्ठी पंचक ध्याऊं मैं सुमर सुमर सुख पाऊं

Parmeshthi Panchak Dhyaun Main Sumar Sumar Sukh Paun

आचार्यश्री तुलसी · पाँचू परमेष्ठी प्यारा

गीत क्रमांक3009

परमेष्ठी पंचक ध्याऊं मैं सुमर सुमर सुख पाऊं — Lyrics

मैं सुमर सुमर सुख पाऊं, परमेष्ठी पंचक ध्याऊं। निज जीवन सफल बणाऊं, परमेष्ठी पंचक ध्याऊं।।

अरहन्त सिद्ध अविनाशी, धर्माचार्य गुण-राशी। है उपाध्याय अभ्यासी, मुनि-चरण शरण में आऊं।।

सहु मुक्ति-महल रा वासी, पधराया वा पधरासी। ज्योती में ज्योति मिलासी, अस्तित्व अलग-लग गाऊं।।

निस्वारथ पर-उपकारी, जग जीवन रा हितकारी। हो बार-बार बलिहारी, मैं छिन छिन ध्यान लगाऊं।।

ज्यांरी वाणी कल्याणी, सद्धर्म मर्म दरसाणी। घट-घट समता सरसाणी, सुण हृदय कमल विकसाऊं।।

जिनमत में मंत्र अनादि, है नमोक्कार अविवादि। सुमरण स्यूं हुवै समाधि, ‘तुलसी’ नित शीष झुकाऊं।।

  1. 1.Parmeshthi Panchak Dhyau Main Sumar Sumar Sukh Paau
  2. 2.यह भजन जैन धर्म के पंच परमेष्ठी — अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु — की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। इसमें आचार्यश्री तुलसी ने सरल शब्दों में बताया है कि इन महान आत्माओं का स्मरण करने से मन को शांति, सुख और सही मार्ग मिलता है। भजन हमें निस्वार्थ सेवा, समता, धर्म और आत्मकल्याण की प्रेरणा देता है।

Roman Transliteration

main sumar sumar sukh paun, parmeshthi panchak dhyaun. nij jivan saphal banaun, parmeshthi panchak dhyaun..

arahanta Siddha avinashi, dharmacharya gun-rashi. hai upadhyay abhyasi, Muni-charan sharan men aun..

sahu mukti-mahal ra vasi, padhraya va padhrasi. jyoti men jyoti milasi, astitva alag-lag gaun..

nisvarath par-upakari, jag jivan ra hitkari. ho bar-bar balihari, main chhin chhin dhyan lagaun..

jyanri vani kalyani, saddharma marma darsani. ghat-ghat samta sarsani, sun hriday kamal viksaun..

jinamat men Mantra anadi, hai namokkar avivadi. sumaran syun huvai samadhi, ‘Tulsi’ nit shish jhukaun..

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