एडिलेड का पंचांग
एडिलेड, Australia — तिथि, नक्षत्र, योग, करण तथा सूर्योदय-सूर्यास्त और राहुकाल का समय।
पंचांग
- तिथि
- नक्षत्र
- योग
- करण
- राशि
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- राहुकाल
पंचांग के पाँच अंग
पंचांग का अर्थ है पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों मिलकर चंद्र-सौर गणना में एक दिन का स्वरूप बताते हैं, और किसी भी पंचांग में मूलतः यही पाँच बातें दी जाती हैं।
तिथि चंद्र-दिन है — वह अवधि जिसमें चंद्रमा सूर्य से बारह अंश आगे बढ़ता है। वार सप्ताह का दिन है। नक्षत्र वह स्थान है जिसमें चंद्रमा उस समय स्थित हो, कुल सत्ताईस में से एक। योग सूर्य और चंद्र के देशांतरों के योग से निकलता है, और करण तिथि का आधा भाग है।
तिथि और तारीख का मेल क्यों नहीं बैठता
तिथि चौबीस घंटे की नहीं होती। चंद्रमा की गति के अनुसार वह लगभग उन्नीस से छब्बीस घंटे तक की हो सकती है, इसलिए उसका आरंभ और अंत हर दिन अलग समय पर पड़ता है — कभी दोपहर में भी।
सामान्य व्यवहार में सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है। यहाँ भी यही परिपाटी रखी गई है। चूँकि यह सूर्योदय से बँधी है, इसलिए एक ही तारीख को दो नगरों की तिथि भिन्न हो सकती है — जो तिथि एक नगर में सूर्योदय के ठीक बाद आरंभ होती है, वह दूसरे नगर में सूर्योदय से पहले ही आरंभ हो चुकी होती है।
नगर से क्या बदलता है और क्या नहीं
सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल स्थान पर निर्भर हैं। इन्हें यहाँ उसी नगर के अक्षांश और देशांतर से निकाला गया है।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्य-चंद्र की स्थिति हैं। किसी एक क्षण पर वे पूरे देश में एक समान रहती हैं — अंतर इसमें है कि उन्हें किस क्षण पर पढ़ा जाए, और वह क्षण स्थानीय सूर्योदय से तय होता है।
गणना की शुद्धता
यहाँ की गणना दृक्-सिद्ध है, अर्थात् मध्यम गति से नहीं, वास्तविक ग्रह-स्थिति से की गई है, और इसमें लाहिरी अयनांश का प्रयोग हुआ है, जिसे अधिकांश भारतीय पंचांग मानते हैं।
मुद्रित पंचांग से कुछ मिनटों का अंतर स्वाभाविक है। सूर्योदय में लगाए जाने वाले क्षितिज-संस्कार और अयनांश के मान में पंचांगों के बीच भेद रहता है। जिस परिवार या समाज में जो पंचांग मान्य हो, व्यवहार में वही रखना चाहिए।
सामान्य प्रश्न
- एडिलेड में आज की तिथि क्या है?
- क्या तिथि और नक्षत्र हर नगर में अलग होते हैं?
- एडिलेड में राहुकाल कब है?
- मुद्रित पंचांग से कुछ मिनट का अंतर क्यों आता है?