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पंचांग

राजमहेंद्रवरम का पंचांग

राजमहेंद्रवरम, Andhra Pradesh — तिथि, नक्षत्र, योग, करण तथा सूर्योदय-सूर्यास्त और राहुकाल का समय।

पंचांग

उदाहरण — 8 सितंबर 2026 के सूर्योदय पर गणना की गई।

तिथि
द्वादशी (कृष्ण)
नक्षत्र
पुष्य
योग
परिघ
करण
तैतिल
राशि
कर्क
सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
18:10
राहुकाल
15:05 – 16:38

आज का चलता हुआ पंचांग तिथि-पत्रक पर देखें, और राजमहेंद्रवरम का चौघड़िया भी।

पंचांग के पाँच अंग

पंचांग का अर्थ है पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों मिलकर चंद्र-सौर गणना में एक दिन का स्वरूप बताते हैं, और किसी भी पंचांग में मूलतः यही पाँच बातें दी जाती हैं।

तिथि चंद्र-दिन है — वह अवधि जिसमें चंद्रमा सूर्य से बारह अंश आगे बढ़ता है। वार सप्ताह का दिन है। नक्षत्र वह स्थान है जिसमें चंद्रमा उस समय स्थित हो, कुल सत्ताईस में से एक। योग सूर्य और चंद्र के देशांतरों के योग से निकलता है, और करण तिथि का आधा भाग है।

तिथि और तारीख का मेल क्यों नहीं बैठता

तिथि चौबीस घंटे की नहीं होती। चंद्रमा की गति के अनुसार वह लगभग उन्नीस से छब्बीस घंटे तक की हो सकती है, इसलिए उसका आरंभ और अंत हर दिन अलग समय पर पड़ता है — कभी दोपहर में भी।

सामान्य व्यवहार में सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है। यहाँ भी यही परिपाटी रखी गई है। चूँकि यह सूर्योदय से बँधी है, इसलिए एक ही तारीख को दो नगरों की तिथि भिन्न हो सकती है — जो तिथि एक नगर में सूर्योदय के ठीक बाद आरंभ होती है, वह दूसरे नगर में सूर्योदय से पहले ही आरंभ हो चुकी होती है।

नगर से क्या बदलता है और क्या नहीं

सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल स्थान पर निर्भर हैं। इन्हें यहाँ उसी नगर के अक्षांश और देशांतर से निकाला गया है।

तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्य-चंद्र की स्थिति हैं। किसी एक क्षण पर वे पूरे देश में एक समान रहती हैं — अंतर इसमें है कि उन्हें किस क्षण पर पढ़ा जाए, और वह क्षण स्थानीय सूर्योदय से तय होता है।

गणना की शुद्धता

यहाँ की गणना दृक्-सिद्ध है, अर्थात् मध्यम गति से नहीं, वास्तविक ग्रह-स्थिति से की गई है, और इसमें लाहिरी अयनांश का प्रयोग हुआ है, जिसे अधिकांश भारतीय पंचांग मानते हैं।

मुद्रित पंचांग से कुछ मिनटों का अंतर स्वाभाविक है। सूर्योदय में लगाए जाने वाले क्षितिज-संस्कार और अयनांश के मान में पंचांगों के बीच भेद रहता है। जिस परिवार या समाज में जो पंचांग मान्य हो, व्यवहार में वही रखना चाहिए।

सामान्य प्रश्न

राजमहेंद्रवरम में आज की तिथि क्या है?
राजमहेंद्रवरम में सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है। वह इस पृष्ठ पर ऊपर नक्षत्र, योग और करण के साथ दी गई है।
क्या तिथि और नक्षत्र हर नगर में अलग होते हैं?
किसी एक क्षण पर स्थिति पूरे देश में एक समान रहती है। अंतर स्थानीय सूर्योदय का है — इससे यह तय होता है कि दिन के आरंभ पर कौन-सी तिथि चल रही थी।
राजमहेंद्रवरम में राहुकाल कब है?
राहुकाल दिनमान का आठवाँ भाग है और वार से तय होता है, इसलिए वह राजमहेंद्रवरम के अपने सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर है। उसका समय ऊपर दिया गया है।
मुद्रित पंचांग से कुछ मिनट का अंतर क्यों आता है?
सूर्योदय में लगाए जाने वाले क्षितिज-संस्कार और अयनांश के मान में पंचांगों के बीच भेद होता है। कुछ मिनटों का अंतर स्वाभाविक है; जिस समाज में जो पंचांग मान्य हो, वही रखना चाहिए।

सितम्बर 2026 का पूरा पंचांग